झारखंड में पेसा नियमावली पर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के लिए हाईकोर्ट ने तीन सप्ताह का समय दिया है। झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ में आज सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया किक पंचायती राज विभाग ने पेसा नियमावली तैयार कर कैबिनेट को स्वीकृति के लिए भेजा था। कैबिनेट ने नियमावली में कुछ विसंगति और त्रुटियां गिनायी है। विभाग उन त्रुटियों को एक सप्ताह के भीतर दूर कर फिर से स्वीकृति के लिए कैबिनेट को भेज देगा। इसके लिए पंचायती राज विभाग द्वारा अदालत से समय की मांग की। खंडपीठ ने तीन सप्ताह का समय देते हुए स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया।
सुनवाई के दौरान पंचायती राज सचिव मनोज कुमार भी उपस्थित थे। झारखंड सरकार की ओर से अपर अधिवक्ता सचिन कुमार ने पंचायती राज विभाग और सरकार का पक्ष रखा। यहां मालूम हो कि झारखंड आदिवासी बुद्धिजीवी मंच की ओर से हाईकोर्ट में पेसा नियमावली लागू करने के लिए जनहित याचिका दायर की गयी थी। सुनवाई के दौरान 2024 हाईकोर्ट ने दो महीने के भीतर पेसा नियमावली लागू करने का आदेश दिया था। लेकिन समय सीमा के भीतर नियमावली नहीं बनी। फिर पंचायती राज विभाग ने तीन माह के भीतर पेसा नियमावली लागू करने का अदालत को आश्वासन दिया। लेकिन तीन महीने का समय बीत जाने के बाद भी पेसा नियमावली लागू नहीं हुई। उसके बाद 29 जुलाई को अदालत ने फिर पेसा नियमावली लागू करने के लिए दो माह का समय दिया। लेकि यह समय भी बीत गया। अदालत ने इस मामले में मुख्य सचिव और विभागीय सचिव को भी सशरीर कोर्ट में बुलाया। सरकार द्वारा बार बार आश्वासन दिए जाने के बाद भी अब तक पेसा नियमावली फंसी हुई है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार कल्याण, कृषि व कुछ अन्य विभाग नियमावली के प्रारूप पर स्वीकृति नहीं दे रहे हैं।